यह राजस्थान की बहुत प्रसिद्ध मिठाई है, खासकर सावन और तीज-त्योहारों पर बनाई जाती है। घेवर की खासियत इसकी जालीदार कुरकुरी बनावट है, जिस पर मलाई, मेवा और चांदी का वर्क सजाकर परोसा जाता है।

Ingredients सामाग्री –

  • Desi Ghee देशी घी – 3 tbsp
  • Ice बर्फ
  • Maida मैदा – 1 cup
  • Cold water ठंडा पानी – 1 cup
  • Sugar चीनी – 1 cup
  • Milk दूध – 1 ltr
  • Kesar केसर
  • Cardamom powder इलायची पाउडर – 1/2 tsp
  • Sugar चीनी – 1 tbsp

विधि (Method) –

घोल तैयार करना –

  • एक बर्तन में घी डालकर बर्फ के टुकड़े या ठंडे पानी से रगड़ें जब तक घी सफेद और क्रीमी न हो जाए।
  • इसमें धीरे-धीरे मैदा डालें और ठंडा पानी मिलाकर पतला घोल (बैटर) तैयार करें।
  • बैटर इतना पतला होना चाहिए कि एकदम बहने लायक हो।
  • अब इसमें थोड़ा दूध और इलायची पाउडर डालकर मिलाएँ।

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घेवर तलना –

  • एक गहरे और भारी तले वाले बर्तन (घेवर पॉट/कढ़ाई/सॉस पैन) में घी गरम करें।
  • गरम घी में बैटर को ऊँचाई से पतली धार में डालें।
  • झाग उठेगा और घेवर जालीदार बनना शुरू होगा।
  • थोड़ा-थोड़ा घोल डालते रहें जब तक घेवर गोल आकार न ले लें।
  • बीच में छेद अपने आप बन जाएगा।
  • सुनहरा होने पर घेवर निकालकर टिश्यू पेपर पर रखें।

रबड़ी बनाएं –

  • कढ़ाई में दूध को डालें और गाढ़ा रबड़ी होने तक पकाएं।
  • रबड़ी में दो छोटी चम्मच चीनी और केसर को डालकर 1 मिनट पकाएं।
  • रबड़ी तैयार है कढ़ाई को उतार कर ठंडा कर लीजिए।

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चाशनी और सजावट –

  • एक कड़ाही में चीनी और पानी डालकर 1 तार की चाशनी बना लें।
  • घेवर को हल्का-सा चाशनी में डुबोकर निकाल लें। या फिर घेवर के ऊपर से चम्मच से चासनी डालें।
  • ऊपर से मलाई/रबड़ी डालें।
  • कटी हुई मेवा, गुलाब की पंखुड़ियाँ और चांदी का वर्क लगाएँ।

सुझाव (Suggestion) –

  • बैटर जितना पतला होगा, घेवर उतना ही जालीदार और कुरकुरा बनेगा।
  • तलते समय आँच मध्यम रखें।
  • तुरंत न खाएँ तो बिना मलाई के घेवर 3–4 दिन तक रखा जा सकता है।
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